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AIIMS नई दिल्ली में मॉड्यूलेटेड रेटिना प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

Launch of Modulated Retina Training Program at AIIMS New Delhi

नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली ने राष्ट्रीय रेटिना कौशल विकास केंद्र में मॉड्यूलेटेड रेटिना प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। अपनी तरह की इस पहली सुविधा का उद्देश्य देशभर में रेटिना संबंधी रोगों की पहचान, निदान और उपचार की क्षमता को मजबूत करना है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विशेष रूप से नेत्र रोग विशेषज्ञों को रेटिना रोगों के प्रबंधन के लिए संरचित, व्यावहारिक और मॉड्यूल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इसके माध्यम से विशेषज्ञों को आधुनिक बुनियादी ढांचे और उन्नत प्रशिक्षण सुविधाओं तक पहुंच मिल सकेगी।

समय पर पहचान से रोकी जा सकती है आंखों की रोशनी जाने की समस्या

इस अवसर पर नेत्र विज्ञान की प्रोफेसर डॉ. राधिका टंडन ने कहा कि मधुमेह और अन्य रेटिना संबंधी बीमारियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की दृष्टि प्रभावित होती है। हालांकि, बीमारी की समय पर पहचान, सही निदान और उचित उपचार के माध्यम से दृष्टि हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है। आकाशवाणी समाचार से विशेष बातचीत में डॉ. टंडन ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नेत्र रोग विशेषज्ञों के लिए ऐसा व्यापक प्रशिक्षण पैकेज विकसित करना है, जिससे वे रेटिना संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों की बेहतर तरीके से पहचान, जांच, निदान और उपचार की योजना बना सकें।

विशेषज्ञों को मिलेगा मॉड्यूल आधारित प्रशिक्षण

राष्ट्रीय रेटिना कौशल विकास केंद्र के प्रोफेसर रोहन चावला ने कहा कि अनुकूलित मॉड्यूल आधारित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नेत्र रोग विशेषज्ञों को रेटिना से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के बारे में गहन और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशिक्षण से चिकित्सक मरीजों का उचित उपचार करने में अधिक सक्षम होंगे और रेटिना संबंधी रोगों के कारण होने वाले अंधेपन की रोकथाम में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।

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तीन वर्षों तक चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

एम्स के इस केंद्र द्वारा अगले तीन वर्षों के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों से जुड़े नेत्र रोग विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में कार्यरत चिकित्सक रेटिना संबंधी रोगों का शीघ्र पता लगाने, सटीक निदान और प्रभावी प्रबंधन करने में सक्षम हो सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, देश में मधुमेह और अन्य रेटिना रोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऐसे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। प्रशिक्षित नेत्र रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़ने से मरीजों को शुरुआती स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने और दृष्टि हानि के मामलों को कम करने में मदद मिल सकती है।

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