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27 की उम्र में शरीर झुका, लोग हंसे… शिवराज ने हिम्मत से बदली जिंदगी

Body stooped at 27, people mocked... Shivraj turned his life around with courage

नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : हिंगोली के शिवराज महादेव जवाने की कहानी सिर्फ बीमारी से लड़ने की नहीं, बल्कि दर्द, सामाजिक तानों और मानसिक संघर्ष के बीच हिम्मत बनाए रखने की कहानी है। Ankylosing Spondylitis (AS) ने महज 27 साल की उम्र में उनके शरीर को आगे की ओर झुका दिया था। लेकिन आज वही शिवराज फिर से तनकर खड़े हैं।

शरीर धीरे-धीरे आगे झुकने लगा

महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के सेनगांव तालुका स्थित पंकनेरगांव के रहने वाले शिवराज महादेव जवाने B.Sc. Computer Science Graduate हैं। कोरोना काल के दौरान उन्हें एक बैंक में पार्ट-टाइम नौकरी मिली। लेकिन नौकरी शुरू होने के करीब डेढ़ साल बाद उनकी जिंदगी में एक ऐसी समस्या सामने आई, जिसने उनके रोजमर्रा के जीवन को पूरी तरह बदल दिया।

शिवराज का शरीर धीरे-धीरे आगे की ओर झुकने लगा। हालत यह हो गई कि वे कुर्सी पर ठीक से बैठ नहीं पाते थे और पीठ के बल सोना भी मुश्किल हो गया था। चलते समय भी उनका शरीर आगे की ओर झुका रहता था। जांच के बाद पता चला कि शिवराज Ankylosing Spondylitis (AS) से जूझ रहे हैं।

बीमारी के साथ लोगों के ताने भी बने बड़ी चुनौती

शरीर में लगातार हो रहे बदलावों का असर सिर्फ उनकी शारीरिक जिंदगी पर नहीं पड़ा। लोगों की नजरें, सवाल और ताने उनकी मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करने लगे। जिस उम्र में युवा अपने करियर और भविष्य को बनाने की कोशिश करते हैं, उसी उम्र में शिवराज को अपने शरीर के बदलते आकार और बढ़ती तकलीफ के साथ जीना पड़ रहा था। लेकिन शिवराज ने खुद को टूटने नहीं दिया। वे कहते हैं, “घर पर बैठकर नेगेटिव सोचने के बजाय, मैं काम में बिजी रहा।” उनकी यही सोच आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

2023 में शुरू हुआ इलाज

साल 2023 में छत्रपति संभाजीनगर में शिवराज का इलाज शुरू हुआ। दवाइयों के बाद उनके दर्द और शरीर के आगे की ओर झुकने की स्थिति में सुधार आने लगा। लेकिन बीमारी ने उनके शरीर पर अपना असर छोड़ दिया था। AS की वजह से पैरों और कमर के पास मौजूद हिप जॉइंट के आकार में भी बदलाव आया था। इसके लिए सर्जरी की गई। इसके बावजूद शरीर का आगे और पीछे का हिस्सा पूरी तरह सीधा नहीं हो पाया। शिवराज के मन में एक सवाल लगातार बना रहा—“क्या मैं फिर से सीधा खड़ा हो सकता हूं?”

मुंबई के जेजे अस्पताल पहुंचकर तलाशा जवाब

अपने इसी सवाल का जवाब तलाशते हुए शिवराज मुंबई के जेजे गवर्नमेंट हॉस्पिटल पहुंचे। यहां स्पाइन सर्जन डॉ. धीरज सोनवणे ने शिवराज की स्थिति को चुनौती के तौर पर स्वीकार किया। शिवराज के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं थी। यह उनके लिए अपने पुराने जीवन, आत्मविश्वास और अपने शरीर पर फिर से भरोसा हासिल करने की लड़ाई थी। इसके बाद उनकी चुनौतीपूर्ण स्पाइन सर्जरी की गई।

सफल सर्जरी के बाद फिर तनकर खड़े हैं शिवराज

सर्जरी सफल रही। लंबे समय तक दर्द, शरीर के झुकने और सामाजिक-मानसिक संघर्ष से गुजरने वाले शिवराज आज फिर से सीधे खड़े हो पा रहे हैं। उनकी कहानी में मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ उनकी Will Power भी बेहद महत्वपूर्ण रही। जिस शरीर को देखकर कभी लोग हंसते थे, आज वही शरीर शिवराज की जिद और संघर्ष की कहानी कहता है।

AS Warriors के लिए शिवराज की कहानी बनी उम्मीद

शिवराज की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की बीमारी से उबरने की कहानी नहीं है। यह उन तमाम लोगों के लिए संदेश है जो Ankylosing Spondylitis जैसी बीमारी के साथ जिंदगी जी रहे हैं। किसी व्यक्ति का शरीर बीमारी की वजह से टेढ़ा या झुका हुआ दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके पीछे छिपे दर्द को सिर्फ देखकर समझा नहीं जा सकता।

इसलिए AS की वजह से शरीर में बदलाव आए तो किसी का मजाक मत उड़ाइए। उस शरीर के पीछे लंबे समय का दर्द, इलाज, संघर्ष और मानसिक दबाव हो सकता है। शिवराज की कहानी एक संदेश देती है— दर्द को समझिए, बीमारी से लड़ रहे इंसान की इज्जत कीजिए और उसे तानों की नहीं, हौसले की जरूरत है। AS Warriors — कोई रहम नहीं, सिर्फ इज्जत और समझ जरूरी है।

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