चुनाव में AI बना प्रशासन का डिजिटल साथी
AI Becomes Administration’s Digital Ally in Elections

जयपुर: राजस्थान के दौसा जिले में पंचायत चुनाव के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अनूठा प्रयोग देखने को मिल रहा है। चुनावी प्रक्रिया को आसान बनाने और मतदानकर्मियों को तत्काल जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर सौम्या झा की पहल पर तैयार किया गया AI आधारित ‘दौसा बॉट’ अब प्रशासन का डिजिटल साथी बनकर उभरा है। व्हाट्सएप के जरिए संचालित यह बॉट निर्वाचन संबंधी नियमों, प्रक्रियाओं, पत्रों और आधिकारिक निर्देशों से जुड़े सवालों के जवाब कुछ ही सेकंड में उपलब्ध करा रहा है। दूसरे चरण के पंचायत चुनाव में इसकी उपयोगिता सामने आने के बाद अब तीसरे चरण में भी इसे मतदानकर्मियों की सहायता के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। चुनाव के दौरान मतदानकर्मियों को कई तरह की जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। मतदान केंद्रों पर व्यवस्थाएं संभालने से लेकर निर्वाचन संबंधी नियमों का पालन करने, जरूरी पत्र भरने और विभिन्न प्रक्रियाओं को पूरा करने तक कर्मचारियों को लगातार आधिकारिक जानकारी की जरूरत पड़ती है। कई बार चुनावी ड्यूटी के दौरान ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जब किसी नियम या प्रक्रिया को लेकर तत्काल मार्गदर्शन आवश्यक हो जाता है। ऐसे में कर्मचारियों को प्रशिक्षण सामग्री खंगालनी पड़ती है या संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है। चुनावी व्यस्तता के बीच यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए दौसा जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर सौम्या झा ने तकनीक का इस्तेमाल कर ‘दौसा बॉट’ तैयार करवाया। इसका उद्देश्य मतदानकर्मियों को निर्वाचन संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना और चुनावी कामकाज के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना है। यह AI आधारित डिजिटल सहायक कर्मचारियों के सवालों के जवाब उपलब्ध कराने के साथ जरूरी दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी तक उनकी पहुंच को भी आसान बनाता है।
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व्हाट्सएप पर सवाल, कुछ सेकंड में जवाब
‘दौसा बॉट’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान पहुंच है। इसे इस्तेमाल करने के लिए कर्मचारियों को किसी अलग मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड करने या विशेष तकनीकी जानकारी हासिल करने की जरूरत नहीं है। मतदानकर्मी अपने मोबाइल में व्हाट्सएप खोलकर सामान्य बातचीत की तरह सवाल लिख सकते हैं। इसके बाद बॉट कुछ ही पलों में संबंधित जानकारी उपलब्ध राता है। कर्मचारी निर्वाचन संबंधी नियमों, मतदान प्रक्रियाओं, आवश्यक पत्रों और प्रशासनिक निर्देशों से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं। इससे उन्हें बार-बार अधिकारियों से संपर्क करने या प्रशिक्षण के दौरान उपलब्ध कराई गई सामग्री में जानकारी तलाश-ने की जरूरत कम हो जाती है। चुनावी ड्यूटी के दौरान जब कर्मचारी व्यस्त रहते हैं, तब यह सुविधा उनके लिए खास तौर पर उपयोगी साबित हो रही है। इस डिजिटल सहायक की उपयोगिता का अंदाजा इसके इस्तेमाल के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर से अब तक 683 अधिकारी-कर्मचारी ‘दौसा बॉट’ का उपयोग कर चुके हैं। इन कर्मचारियों ने कुल 8,643 सवाल पूछे और उनके जवाब प्राप्त किए। यानी कर्मचारियों ने चुनावी कामकाज से जुड़ी विभिन्न जानकारियों के लिए इस डिजिटल माध्यम का लगातार इस्तेमाल किया।
नामांकन के दिन एक ही दिन में 1,408 सवालों के जवाब
‘दौसा बॉट’ की सक्रियता चुनावी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण दिनों में भी देखने को मिली। 29 अक्टूबर को नामांकन के दिन इस डिजिटल सहायक ने एक ही दिन में 1,408 सवालों के जवाब दिए। यह आंकड़ा बताता है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों को तत्काल जानकारी की कितनी जरूरत पड़ती है और डिजिटल माध्यम किस तरह उनकी सहायता कर सकता है। नामांकन से जुड़े काम में कई तरह की प्रक्रियाएं और दस्तावेज शामिल होते हैं। ऐसे समय में किसी नियम, पत्र या आधिकारिक निर्देश को लेकर जानकारी प्राप्त करना जरूरी होता है। ‘दौसा बॉट’ के माध्यम से कर्मचारी अपने सवाल सीधे पूछकर जवाब हासिल कर सकते हैं। इससे उन्हें जानकारी के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम होती है। आंकड़ों के अनुसार, नामांकन के दिन पूछे गए आधे सवालों के जवाब महज 35 सेकंड में उपलब्ध हो गए। इस तरह कर्मचारियों को कम समय में जरूरी जानकारी प्राप्त करने की सुविधा मिली। चुनावी कामकाज के दौरान समय की अहमियत को देखते हुए यह सुविधा प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सहज बनाने में मददगार साबित हो सकती है।
रात 3 बजे भी सक्रिय रहा डिजिटल सहायक
चुनावी कामकाज केवल कार्यालय समय तक सीमित नहीं रहता। कई बार मतदान से पहले तैयारियों, दस्तावेजों और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए कर्मचारियों को देर रात तक काम करना पड़ता है। ऐसे समय में किसी नियम या प्रक्रिया को लेकर जानकारी की जरूरत पड़ने पर अधिकारियों से संपर्क करना आसान नहीं होता। दौसा बॉट’ ने इस समस्या को कम करने में भी मदद की। आंकड़ों के मुताबिक, कुल सवालों में करीब 10 प्रतिशत सवालों के जवाब रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच दिए गए। खास बात यह रही कि रात 3 बजे भी कर्मचारी इस डिजिटल सहायक से सवाल पूछ रहे थे और उन्हें जवाब मिल रहे थे। इससे कर्मचारियों को समय की बाध्यता के बिना निर्वाचन संबंधी जानकारी प्राप्त करने की सुविधा मिली। जब सामान्य कार्यालय समय समाप्त हो जाता है, तब भी यह डिजिटल माध्यम उपलब्ध रहता है। चुनावी ड्यूटी के दौरान देर रात काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
वॉइस नोट से सवाल, जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध
‘दौसा बॉट’ की एक और खासियत यह है कि कर्मचारी केवल लिखकर ही नहीं, बल्कि अपनी आवाज के जरिए भी सवाल पूछ सकते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कर्मचारियों ने 495 सवाल वॉइस नोट के माध्यम से पूछे। इससे उन कर्मचारियों को भी सुविधा मिलती है, जिन्हें सवाल लिख के बजाय बोलकर जानकारी प्राप्त करना आसान लगता है। इसके अलावा, ‘दौसा बॉट’ ने कर्मचारियों को 1,801 पत्र और आधिकारिक पत्र भी उपलब्ध करवाए। यानी इसका इस्तेमाल केवल सामान्य सवालों के जवाब जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचन संबंधी जरूरी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल करने में भी किया जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया में विभिन्न पत्रों और आधिकारिक निर्देशों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। कर्मचारियों को सही दस्तावेज समय पर उपलब्ध होना जरूरी है। ऐसे में व्हाट्सएप के माध्यम से जरूरी पत्र और पत्र प्राप्त करने की सुविधा उनके काम को आसान बना सकती है। इससे प्रशिक्षण सामग्री और दस्तावेजों में जानकारी तलाश-ने में लग-ने वाला समय भी कम हो सकता है।
कर्मचारियों के लिए आसान हुआ चुनावी कामकाज
दूसरे चरण के पंचायत चुनाव में ‘दौसा बॉट’ का इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों के अनुभवों से इस पहल की उपयोगिता सामने आई है। चुनावी ड्यूटी के दौरान कई बार छोटी-छोटी जानकारियों के लिए भी तत्काल मार्गदर्शन की जरूरत होती है। ऐसे में व्हाट्सएप पर उपलब्ध यह सुविधा कर्मचारियों के लिए मददगार साबित हुई। किसी नियम, पत्र या आदेश को लेकर असमंजस की स्थिति में कर्मचारी सीधे सवाल पूछ सकते हैं। इससे उन्हें संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए अधिकारियों से संपर्क करने या दस्तावेजों में बार-बार तलाश करने की जरूरत कम होती है। खासकर चुनावी व्यस्तता के दौरान यह सुविधा कर्मचारियों का समय बचाने में मदद कर सकती है। इस नवाचार का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि निर्वाचन संबंधी जानकारी कर्मचारियों तक एक समान डिजिटल माध्यम से पहुंचती है। इससे बार-बार एक ही सवाल पूछे जाने और अलग-अलग स्तर पर जानकारी तलाश-ने की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, निर्वाचन संबंधी महत्वपूर्ण निर्णयों और आधिकारिक प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों तथा सक्षम अधिकारियों के निर्देशों का पालन आवश्यक रहता है।
जिला स्तर पर AI के इस्तेमाल की नई पहल
दौसा में तैयार किया गया ‘दौसा बॉट’ यह दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल केवल बड़े संस्थानों या तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। जिला स्तर पर प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाने और कर्मचारियों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने में भी इसकी भूमिका सामने आ रही है। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर सौम्या झा की इस पहल ने चुनावी प्रबंधन में तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं को सामने रखा है। यदि तकनीक को जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया जाए, तो सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सहज और सुलभ बना-या जा सकता है। खासकर ऐसी परिस्थितियों में, जहां कर्मचारियों को कम समय में बड़ी मात्रा में जानकारी की जरूरत होती है, डिजिटल सहायक उपयोगी साबित हो सकते हैं। ‘दौसा बॉट’ के माध्यम से कर्मचारियों को निर्वाचन संबंधी जानकारी, नियमों, प्रक्रियाओं और दस्तावेजों तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है। इससे चुनावी कामकाज के दौरान जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है और कर्मचारियों को तत्काल मार्गदर्शन मिल रहा है।
तीसरे चरण के चुनाव में भी मिलेगी मदद
दूसरे चरण में मिले बेहतर उपयोग के बाद अब तीसरे चरण के पंचायत चुनाव में भी ‘दौसा बॉट’ मतदानकर्मियों की सहायता करेगा। प्रशासन का प्रयास है कि कर्मचारियों को जरूरी जानकारी समय पर मिले और चुनावी प्रक्रिया के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान आसानी से हो सके। 683 अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा 8,643 सवाल पूछना, नामांकन के दिन 1,408 सवालों के जवाब मिलना, रात 3 बजे तक डिजिटल सहायक का सक्रिय रहना और हजारों पत्रों की उपलब्धता इस पहल के उपयोग को दर्शाते हैं। मिलाकर दौसा का ‘दौसा बॉट’ पंचायत चुनाव में AI के व्यावहारिक इस्तेमाल का उदाहरण बनकर सामने आया है। यह डिजिटल सहायक मतदानकर्मियों को निर्वाचन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने और प्रशासनिक कामकाज को सरल बनाने में मदद कर रहा है।
अब तीसरे चरण के चुनाव में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी, जहां कर्मचारियों को समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और चुनावी प्रक्रियाओं को सुचारु रूप से पूरा करने में यह डिजिटल साथी सहायता करेगा।



