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ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग, महाराष्ट्र करणी सेना ने पीएम को लिखा पत्र

Demand to confer Bharat Ratna upon Gyanesh Kumar; Maharashtra Karni Sena writes to the PM

मुंबई:  मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग महाराष्ट्र करणी सेना ने की है। संगठन के प्रमुख अजय सिंह सेंगर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह मांग उठाई है। पत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर ज्ञानेश कुमार की सराहना की गई है। साथ ही, उनके खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है। महाराष्ट्र करणी सेना का दावा है कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से बिना किसी रक्तपात या संघर्ष के मतदाता सूचियों में मौजूद कथित अनियमितताओं को दूर करने की दिशा में काम किया गया है। संगठन ने इसे महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए। अजय सिंह सेंगर के मुताबिक, मतदाता सूचियों को दुरुस्त करना और इनमें मौजूद दोहरी प्रविष्टियों को हटाना चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए जरूरी है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इस प्रक्रिया का समर्थन किया जाना चाहिए। हालांकि, संगठन की ओर से घुसपैठियों को मतदाता सूची से बाहर किए जाने संबंधी किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

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विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

महाराष्ट्र करणी सेना ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन प्रमुख अजय सिंह सेंगर ने पत्र में कहा है कि ऐसे प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा जाना चाहिए और उनके खिलाफ देश-विरोधी गतिविधियों से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। यह संगठन की ओर से की गई मांग है; संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ किसी अपराध या कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण सक्षम अधिकारियों और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही हो सकता है। सेंगर का कहना है कि चुनावी व्यवस्था को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए मतदाता सूचियों की जांच महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है, तो ऐसी प्रविष्टियों की पहचान कर नियमानुसार सुधार किया जाना चाहिए। संगठन ने इसे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए SIR के समर्थन की अपील की है।

‘एक देश, एक डेटाबेस’ व्यवस्था का किया उल्लेख

अपने पत्र में महाराष्ट्र करणी सेना ने ‘एक देश, एक डेटाबेस’ की अवधारणा का भी उल्लेख किया है। संगठन का दावा है कि मतदाता सूचियों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने और उनकी जांच करने से अलग-अलग राज्यों या विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के नाम की दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची का सही होना महत्वपूर्ण है, क्यों इसके आधार पर पात्र मतदाताओं को मतदान का अधिकार मिलता है। हालांकि, मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टि और किसी व्यक्ति की नागरिकता का प्रश्न अलग-अलग विषय हैं। किसी नाम की एक से अधिक जगह मौजूदगी अपने आप में यह साबित नहीं करती कि संबंधित व्यक्ति विदेशी नागरिक है। ऐसे मामलों में संबंधित नियमों और सत्यापन प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाता है।

पत्र में हिंदू समुदाय और विभाजन का भी जिक्र

अजय सिंह सेंगर ने अपने पत्र में 1947 के भारत विभाजन का उल्लेख करते हुए हिंदुओं के अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित विचार भी रखे हैं। पत्र में उन्होंने कहा है कि हिंदुओं को दो मतों का अधिकार देने से देश और हिंदू, बौद्ध, जैन तथा सिख समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। यह मांग और इससे जुड़े विचार महाराष्ट्र करणी सेना के प्रमुख की ओर से रखे गए हैं। इस प्रकार, महाराष्ट्र करणी सेना ने अपने पत्र के माध्यम से एक ओर SIR प्रक्रिया के समर्थन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की अपील की है।

अब इस पत्र और इसमें उठाई गई मांगों पर संबंधित स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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