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कुल्लू में 21 अक्टूबर से शुरू होगा अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव, सजने लगा ढालपुर मैदान

The international Dussehra festival will start from October 21 in Kullu, with the decoration of Dhalpur Maidan.

हिमाचल प्रदेश, शिमला: देशभर में जहां 20 अक्टूबर को दशहरा उत्सव मनाया जाएगा और रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा, वहीं हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में उदया तिथि के अनुसार अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की शुरुआत 21 अक्टूबर से होगी। भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ शुरू होने वाला यह सात दिवसीय उत्सव कुल्लू की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रमुख हिस्सा है। उत्सव को लेकर कुल्लू के ढालपुर मैदान में तैयारियां तेज हो गई हैं। मैदान में जहां व्यापारी अपनी दुकानें लगाने में जुटे हैं, वहीं भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर को भी सजाया जा रहा है। दशहरा उत्सव समिति की ओर से माल रोड को रंग-बिरंगे और आकर्षक डिजाइन से सजाने का काम भी जारी है।

भगवान रघुनाथ की रथयात्रा से होगा आगाज

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान रघुनाथ की रथयात्रा होती है। 21 अक्टूबर को ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी और इसी के साथ सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का औपचारिक शुभारंभ होगा।रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले देवी-देवताओं की भी सहभागिता रहती है। इस दौरान कुल्लू घाटी का माहौल पूरी तरह धार्मिक और उत्सवी रंग में रंग जाता है।

राज्यपाल करेंगे शुभारंभ

जानकारी के अनुसार, 21 अक्टूबर को राज्यपाल कविंद्र गुप्ता अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का शुभारंभ करेंगे। वहीं, सात दिवसीय उत्सव के अंतिम दिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ढालपुर पहुंचेंगे और समारोह का समापन करेंगे। राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से उत्सव को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

उदया तिथि के कारण 21 अक्टूबर से दशहरा

भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह के अनुसार, कुल्लू में दशहरा उत्सव सनातन धर्म के पंचांग के अनुसार मनाया जाता है। उनके मुताबिक 20 अक्टूबर को दशमी तिथि दोपहर बाद शुरू होगी, जबकि दशमी तिथि का सूर्योदय 21 अक्टूबर को होगा। इसी वजह से उदया तिथि के आधार पर कुल्लू में दशहरा उत्सव की शुरुआत 21 अक्टूबर से की जाएगी। उन्होंने बताया कि कुल्लू दशहरा देश के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरा उत्सव से अपनी परंपराओं और आयोजन के तरीके के कारण अलग पहचान रखता है।

देवी-देवताओं के स्वागत की तैयारी

कुल्लू दशहरा उत्सव में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवताओं की भागीदारी होती है। पिछले वर्ष 300 से अधिक देवी-देवताओं ने उत्सव में हिस्सा लिया था। इस वर्ष भी विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले देवी-देवताओं का स्वागत किया जाएगा। इसके लिए उत्सव स्थल पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भगवान रघुनाथ के लिए विशेष वस्त्र भी तैयार कर लिए गए हैं और उनके अस्थायी शिविर को सजाने का काम लगातार जारी है।

ढालपुर मैदान में सजने लगा मेला

धार्मिक आयोजनों के साथ कुल्लू दशहरा एक बड़े सांस्कृतिक और व्यापारिक मेले के रूप में भी अपनी पहचान रखता है। ढालपुर मैदान में व्यापारी अपनी दुकानों और स्टॉल को तैयार करने में जुट गए हैं। मैदान में अलग-अलग स्थानों पर दुकानें सजने लगी हैं और आने वाले दिनों में यहां देश के विभिन्न हिस्सों से व्यापारी और पर्यटक पहुंचेंगे। माल रोड को भी उत्सव के मद्देनजर आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। रंग-बिरंगे डिजाइन और सजावट के चलते कुल्लू में दशहरा उत्सव की रौनक धीरे-धीरे बढ़ने लगी है।

देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। हर वर्ष बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक और श्रद्धालु कुल्लू पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां की लोक संस्कृति, देवी-देवताओं की परंपरा, स्थानीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रम पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहते हैं।

इस बार भी उत्सव को लेकर स्थानीय लोगों, व्यापारियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है।

 

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