भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा
‘India does not want war, but will not compromise on security.

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में NDTV Defence Summit 2026 में भारत की रक्षा नीति और भविष्य की युद्ध-तैयारी पर बात की। भारत केवल आज की सैन्य जरूरतें पूरी करने पर निर्भर नहीं रह सकता, बल्कि भविष्य की तकनीक और बदलते युद्धक्षेत्र को ध्यान में रखकर रक्षा क्षमता विकसित करनी होगी। राजनाथ सिंह के अनुसार आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब युद्ध केवल सैनिकों, टैंकों, तोपों और मिसाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि AI, ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम, साइबर, अंतरिक्ष और अन्य तकनीकों का महत्व बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश तकनीकी रूप से आगे होंगे, उन्हें युद्ध के मैदान में रणनीतिक लाभ मिलेगा। इसलिए भारत की रक्षा योजना का उद्देश्य ऐसी क्षमताएं तैयार करना है जो आज की जरूरत के साथ भविष्य की चुनौतियों का भी सामना कर सकें।
वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को कुल ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। इसमें से ₹1.39 लाख करोड़ घरेलू रक्षा उद्योग से खरीद के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह Capital Acquisition Budget का लगभग 75% है। यह समझना जरूरी है कि 75% पूरे रक्षा बजट का हिस्सा नहीं है। यह मुख्य रूप से capital acquisition/procurement के उस बजट का 75% है जिसका उपयोग नए सैन्य उपकरण और क्षमताएं हासिल करने में किया जाता है। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू कंपनियों को लंबे समय के निवेश और रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बाजार उपलब्ध कराना है। 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को ₹7.85 लाख करोड़ मिले हैं। PIB के अनुसार यह 2025-26 के Budget Estimates की तुलना में लगभग 15.19% अधिक है। Capital Head के तहत करीब ₹2.19 लाख करोड़ और capital acquisition के लिए लगभग ₹1.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका एक बड़ा हिस्सा नई सैन्य क्षमताओं के विकास और खरीद पर खर्च होना है, जिसमें अगली पीढ़ी के fighter aircraft, weapons, ships, submarines, UAVs और drones जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
भारत के रक्षा उत्पादन में बदलाव
भारत का defence production FY 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि 2014 में यह करीब ₹46,000 करोड़ था। रक्षा निर्यात में भी वृद्धि हुई है। सरकार ने 2026 में बताया कि भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है और FY 2025-26 में defence exports लगभग ₹38,424 करोड़ रहे। इससे भारत की भूमिका केवल हथियारों के खरीदार के बजाय defence manufacturing और exports में भी बढ़ रही है।
राजनाथ सिंह ने “शांति और कमजोरी” के बारे में कहा
उनका एक राजनीतिक-सामरिक संदेश यह भी था कि भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों को कमजोर रखेगा। उनके अनुसार भारत किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करने की नीति नहीं रखता और शांति का समर्थन करता है, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने इसी संदर्भ में यह विचार रखा कि शांति बनाए रखने के लिए मजबूत रक्षा तैयारी जरूरी है। NDTV Defence Summit की रिपोर्ट में भी उन्होंने कहा कि शांति के समय की तैयारी युद्ध के समय होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है। 2026-27 के बजट में DRDO का allocation भी बढ़कर ₹29,100.25 करोड़ किया गया है, जो 2025-26 के ₹26,816.82 करोड़ से अधिक है। भारत की रक्षा नीति “विदेश से हथियार खरीदने” से आगे बढ़कर “भारत में technology + design + manufacturing + complete defence ecosystem बनाने” की दिशा में जा रही है। “एक लाख 39 हजार करोड़ रुपये के रक्षा बजट का लगभग 75 प्रतिशत” घरेलू उद्योग के लिए निर्धारित है।
अधिक सटीक रूप से, ₹1.39 लाख करोड़ पूरे ₹7.85 लाख करोड़ के रक्षा बजट का 75% नहीं है। यह Capital Acquisition Budget के लगभग 75% के बराबर है।



