भारत का नारियल क्षेत्र मजबूत,उत्पादन से मूल्यवर्धन और निर्यात तक बढ़ा दायरा
India's coconut sector is robust; scope expanded from production to value addition and exports.
नई दिल्ली: भारत का नारियल क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि विकास और देश की सांस्कृतिक परंपराओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। करीब एक करोड़ किसान और लगभग तीन करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। सरकार की नीतिगत पहलों और नारियल विकास बोर्ड के माध्यम से संचालित योजनाओं के चलते देश में नारियल उत्पादन के साथ-साथ मूल्यवर्धित उत्पादों और निर्यात को भी बढ़ावा मिल रहा है।
वैश्विक नारियल उत्पादन में भारत शीर्ष पर
भारत वैश्विक नारियल उत्पादन में पहले स्थान पर है। देश के प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश का विशेष योगदान है। क्षेत्रफल के लिहाज से केरल, उत्पादन के मामले में तमिलनाडु और उत्पादकता में आंध्र प्रदेश आगे है। नारियल की खेती देश के तटीय और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार है। इसके अलावा नारियल आधारित प्रसंस्करण उद्योग रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को भी बढ़ावा देता है।
पारंपरिक उत्पादों से आगे बढ़ा निर्यात
भारत का नारियल उद्योग अब केवल पारंपरिक नारियल उत्पादों तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजार में वर्जिन कोकोनट ऑयल, नारियल का दूध और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की मांग ने भारतीय उद्योग के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। मूल्यवर्धन से किसानों और प्रसंस्करण इकाइयों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ नारियल आधारित उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं।
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खेती के विस्तार और जीर्णोद्धार पर जोर
सरकार की योजनाओं के तहत नारियल क्षेत्र के विस्तार और पुराने बागानों के जीर्णोद्धार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 2,175 हेक्टेयर नया क्षेत्र नारियल की खेती के तहत जोड़ा गया, जबकि 1,672 हेक्टेयर क्षेत्र को जीर्णोद्धार के तहत कवर किया गया। इन पहलों का उद्देश्य नारियल उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के साथ किसानों को बेहतर उत्पादकता और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना है।
बजट 2026-27 में ‘नारियल संवर्धन योजना’
नारियल क्षेत्र को नई गति देने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘नारियल संवर्धन योजना’ शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य नारियल क्षेत्र में सतत विकास, निर्यात क्षमता और किसानों की आय को मजबूत करना है। नीतिगत सहयोग के साथ उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार विस्तार को एक साथ बढ़ावा मिलने से नारियल क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बल
नारियल केवल एक कृषि फसल नहीं, बल्कि इससे जुड़े किसानों, श्रमिकों, प्रसंस्करण इकाइयों, व्यापारियों और निर्यातकों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। मूल्यवर्धित उत्पादों की बढ़ती मांग से ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्यम और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
सरकार के निरंतर नीतिगत समर्थन के साथ भारत का नारियल क्षेत्र उत्पादन, मूल्यवर्धन, निर्यात और आजीविका—इन सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक और वैश्विक बाजारों पर बढ़ते फोकस से भारतीय नारियल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होने की संभावना है.



