नकली वर्क ऑर्डर का बड़ा खेल! कुंभ मेले के नाम पर 3.4 करोड़ की ठगी
₹3.4 crore fraud in the name of Kumbh Mela: Two more arrested in fake work order case
नासिक: कुंभ मेले से जुड़े काम दिलाने के नाम पर कथित तौर पर नकली वर्क ऑर्डर जारी कर जनता से करीब 3.4 करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में नासिक पुलिस ने जामनेर से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शकील अहमद सलीमुद्दीन शेख और मोहम्मद वसीम अब्दुल गफ्फार के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों को आज नासिक कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें सोमवार तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर कथित फर्जीवाड़े में उनकी भूमिका और पैसों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
नकली वर्क ऑर्डर से करोड़ों की ठगी का आरोप
पुलिस के अनुसार, मामले में आरोप है कि कुंभ मेले से संबंधित काम दिलाने का भरोसा देकर लोगों को नकली वर्क ऑर्डर दिखाए गए और इसी के जरिए उनसे बड़ी रकम वसूली गई। इस पूरे मामले में करीब 3.4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पहले जामनेर से तनय महाजन, नरेंद्र महाजन और शोएब अहमद शेख को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इन आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों तक पहुंच बनाई।
खेत में छिपा मिला चौथा आरोपी
पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने अब्दुल रईस अब्दुल मुनाफ शेख को भी गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, वह परताखेड़े स्थित एक खेत में छिपा हुआ था। उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था, जिसके बाद अदालत ने उसे 17 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया था।

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14 अगस्त को दो और गिरफ्तारियां
जांच को आगे बढ़ाते हुए नासिक पुलिस ने 14 अगस्त को जामनेर से दो और संदिग्धों—शकील अहमद सलीमुद्दीन शेख और मोहम्मद वसीम अब्दुल गफ्फार—को गिरफ्तार किया। आज दोनों को नासिक कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें सोमवार तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार करने, लोगों से रकम लेने और पूरे नेटवर्क को संचालित करने में इन दोनों की क्या भूमिका थी।
पुलिस जांच में सामने आएगा पूरा नेटवर्क
मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के जरिए कथित ठगी के पूरे नेटवर्क, फर्जी दस्तावेजों, पैसों के लेन-देन और अन्य संभावित आरोपियों की जानकारी जुटाने में लगी है।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित फर्जीवाड़े में कुल कितने लोग शामिल थे और ठगी की रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।



